Posted by: amitabhtri | August 30, 2006

एक और फतवा

अभी जब गणेश जी सहित देश के अनेक मन्दिरों में विभिन्न देवप्रतिमाओं ने दुग्ध पान किया तो सामान्य तौर पर हिन्दुओं ने इसे श्रद्धा के तौर पर नकारा भले न हो परन्तु धर्मगुरू और अन्य लोगों ने इसे अन्धविश्वास ही अधिक माना. इससे हिन्दू धर्म की तार्किकता प्रमाणित होती है.      परन्तु इसी देश में ऐसे धर्म के अनुयायी भी रहते हैं जो न केवल धर्म पालन में वरन् दिन प्रतिदिन के नियम पालन में भी धार्मिक कानून से ही संचालित होते हैं. अभी वन्देमातरम् पर फतवे की गूँज कम भी नहीं हुई थी कि सहारनपुर स्थित सुन्नी मुसलमानों के सबसे बड़े संस्थान दारूल उलूम देवबन्द ने लखनऊ के सलीम चिश्ती के प्रश्न के उत्तर में फतवा जारी किया है कि बैंक से ब्याज लेना या जीवन बीमा कराना इस्लामी कानून या शरियत के विरूद्ध है. दारूल उलूम के दो मुफ्तियों के साथ परामर्श कर मोहम्मद जफीरूद्दीन ने यह फतवा जारी किया . आल इण्डिया पर्सनल लॉ बोर्ड के अनेक सदस्यों ने इसे उचित ठहराया है. उनके अनुसार जीवन बीमा कराने का अर्थ है अल्लाह की सर्वोच्चता को चुनौती देना.       यह नवीनतम उदाहरण मुसलमानों की स्थिति पर फिर से विचार करने के लिये पर्याप्त है. आखिर जब इस आधुनिक विश्व में जब सभी धर्मावलम्बी लौकिक विषयों में देश के कानूनों का अनुपालन करते हैं तो फिर एक धर्म अब भी लौकिक सन्दर्भों में शरियत का आग्रह क्यों रखता है.      हो सकता है बहुत से लोगों का तर्क हो कि कितने मुसलमान शरियत के आधार पर चलते हैं, परन्तु प्रश्न शरियत के पालन का उतना नहीं है जितना यह कि शरियत का पालन कराने की इच्छा अब भी मौलवियों और मुस्लिम धर्मगुरूओं में है. यही सबसे खतरनाक चीज है क्योंकि शब्द और विचार ही वे प्रेरणा देते हैं  जिनसे व्यक्ति कुछ भी कर गुजरने का जज्बा पालता है. मुस्लिम समस्या का मूल यहाँ है, जब तक उनकी इस मानसिकता में बदलाव नहीं आयेगा प्रत्येक युग में इस्लामी कट्टरता का खतरा बना रहेगा.

Responses

क्यों आलतू फालतू फतवों को बढावा दे रहे हैं आप?
ये देश है सभी धर्मों का
अगर आप भी धर्म और फतवे की बात करें तो उसकी चर्चा और हज़ार वर्ष चलती रहेगी।
फालतू फतवों पर तवज्जा ना दें - काम से काम रखें
वनदे मातरम् फतवे का जवाब हमने अपने ब्लॉग पर लिख दिया
शुऐब

SHUIAB BHAI
,
AAPKE BLOG PAR GAYE THE..
AAPKA KOI JAWAB TO NAHI MILAA .. HAAN 404 KA JHATKA KHAA KE WAPAS AAGAYE.

आपका चिट्ठा हिन्दूओं की समस्या तथा देश के हितो को उजागर करता रहे ऐसी कामना करता हूं. जाने-अनजाने यह मुस्लिम विरोधी न बने तो ही बेहतर हैं. ऐसे फतवे जिनसे दुसरे धर्मो के लोगो पर तथा देश पर कोई असर न पड़ता हो उसे मुसलमानो पर छोड़ दिया जाना चाहिए. यह उनकी अपनी समस्या हैं.

शुएब के चिट्ठे पर 404 की त्रुटी तकनिकी खामि की वजह से हुई हैं. शुएब के कथन पर शक करने का कोई कारण नहीं हैं.

विजय भाईः
पहले तो 404 झटके के लिए आपसे क्षमा चाहता हूं - मुझे खुद नही पता कि सही लिंक देने के बावजूद वोह झटका कैसे उभर आया ;) खैर आपको फिर टाइम मिले तो मेरे ब्लॉग पर ताज़ा लेख पोस्ट है “ये खुदा है” 30
http://shuaibi.wordpress.com

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