Posted by: amitabhtri | September 15, 2006

आधुनिक जीवन शैली

आधुनिक जीवन शैली में जंक फूड, विद्यालय की पढ़ाई के बोझ और बड़े स्तर पर बाजारीकरण की चपेट में आकर बच्चों के बचपन की रचनात्मकता खोती जा रही है. ब्रिटेन में अनेक अकादमिकों सहित बच्चों के अभिभावकों और मनोविज्ञानियों ने इस आशय का पत्र ब्रिटेन के एक प्रमुख समाचार पत्र को भी लिखा है. डेली टेलीग्राफ को लिखे पत्र में बच्चों के रचनाकार फिलिप पुलमैन और जैक्यूलिन विल्सन और वैज्ञानिक बारोनेस ग्रीनफील्ड ने बच्चों में बढ़ रही अवसाद की घटनाओं की ओर ध्यान दिलाते हुये इस पर कार्रवाई करने की माँग भी की है.      क्या हम बच्चों को पालना भूल गये शीर्षक के इस पत्र में इस बात का दावा किया गया है कि सरकार यह समझ पाने में पूरी तरह विफल है कि बच्चों का विकास कैसे होता है.      बच्चों से सम्बन्धित इन विशेषज्ञों का मानना है दयनीय आहार, बच्चों को व्यायाम न करने देना और अकादमिक रूप से उन्हें सीमित कर देने से उनकी रचनात्मकता भी सीमित होकर रह गई है. इस पत्र  के अन्त में कहा गया है कि बच्चों को शारीरिक क्षति से बचाने के तो पूरे प्रबन्ध हमने किये हैं परन्तु इस क्रम में उनकी सामाजिक और भावनात्मक आवश्यकताओं की ओर ध्यान नहीं दिया .इन विश्लेषकों ने किशोर और युवाओं में बढ़ रही गाली-गलौज और हिंसा की प्रवृत्ति के लिये इसी मानसिक दशा को दोषी ठहराया है. इन शिकायतों के बीच इन अकादमिकों ने 21वीं शताब्दी में बच्चों के पालन-पोषण पर नये सिरे से देश व्यापी बहस की आवश्यकता जताई है.

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