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हरभजन ने नाक कटाई

Posted by amitabhtri on अप्रैल 26, 2008

अब जबकि यह स्पष्ट हो गया है कि 25 अप्रैल को मोहाली में मुम्बई इण्डियन और किंग्स इलेवन के मध्य हुए मैच के उपरांत मुम्बई इण्डियन के कार्यवाहक कप्तान हरभजन सिंह ने किंग्स एलेवन की टीम के सदस्य और भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज और अपने सहयोगी श्रीकुमारन श्रीसंत को झापड मार दिया था तो हरभजन सिंह मुसीबत में फँसते नजर आ रहे हैं। कल तक इस विषय पर ना नुकुर करने वाली बीसीसीआई और किंग्स इलेवन फ्रेंचाइजी की स्वामिनी प्रीती जिंटा ने अब इस घटना को स्वीकार किया है और श्रीसंत की टीम ने औपचारिक शिकायत बीसीसीआई को भेजकर स्पष्ट किया है कि हरभजन सिंह ने यह हरकत बिना किसी उकसावे के की है और इसे कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता। किंग्स इलेवन की शिकायत पर बीसीसीआई ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की जाँच मैच रेफरी फारूख इंजीनियर करेंगे और मामले में दोषी पाये जाने पर हरभजन सिंह के विरुद्ध आईसीसी के नियमों के अंतर्गत कार्रवाई होगी। इस नियम के अंतर्गत हरभजन सिंह पर शेष मैचों के लिये प्रतिबन्ध लग सकता है।

इस घटना से समस्त देश के क्रिकेट प्रेमी हतप्रभ हैं और कुछ ही महीने पहले एंड्र्यू सायमण्ड्स के साथ आस्ट्रेलिया दौरे में हुए विवाद के समय जिस हरभजन के साथ राष्ट्र की प्रतिष्ठा के नाम पर एकसाथ खडे थे वही क्रिकेट प्रेमी आज देश के विभिन्न हिस्सों में हरभजन सिह का पुतला फूँक रहे हैं।

इस घटनाक्रम में सर्वाधिक रोचक और अपमानजनक तथ्य यह है कि जिस टूर्नामेंट में हरभजन सिंह ने यह हरकत की है उसमें अधिकाँश आस्ट्रेलियाई खिलाडी भी भाग ले रहे हैं जिन्होंने अभी कुछ महीने पूर्व ही हरभजन सिंह पर असभ्य आचरण का आरोप लगाते हुए उन्हें नस्लभेदी और जंगली घास फूस तक कह डाला था। आज आस्ट्रेलिया के ये खिलाडी निश्चय ही मन ही मन मुस्करा रहे होंगे कि हरभजन सिंह ने अपने आचरण से समस्त विश्व को सन्देश दे दिया है कि उन्हें अपने ऊपर नियंत्रण नहीं है और वे मैदान पर अपना आपा खो देते हैं। हरभजन सिंह ने इस बार अपने आचरण का निशाना अपनी ही टीम के एक सदस्य को बनाया जो टीम में उन्हें बडे भाई के समान देखते हैं।

 

इस घटनाक्रम से क्रिकेट के नये तेवरों पर सवाल उठता है। आस्ट्रेलिया में अपने शानदार प्रदर्शन के बाद एकदिवसीय मैचों के लिये टीम के कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी ने बडे जोर शोर से दावा किया था कि आज क्रिकेट केवल मैदान का ही खेल नहीं रह गया है और इसमें स्लेजिंग भी हिस्सा हो गया है और उन्हें इस बात की खुशी है कि उनकी टीम में अनेक ऐसे खिलाडी हैं जो अपने जज्बात पर काबू रखते हुए दूसरी टीम के खिलाडियों को हर दृष्टि से जवाब देने में सक्षम हैं। भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान के ऐसे विचारों को भारतीय क्रिकेट में नये युग की संज्ञा दी गयी और क्रिकेट प्रेमी भी इस बात पर फूले भी नहीं समाये कि अब भारतीय टीम भी गाली गलौज में गोरी चमडी को शिकस्त देने में सक्षम है परंतु शायद हम यह भूल गये कि शालीनता छोड्कर आक्रामक व्यवहार अपनाने के अपने लाभ हैं तो उससे हानि भी है। हरभजन सिंह की असभ्यता यही संकेत देती है कि वास्तव में भारत में क्रिकेट का तेवर बदल रहा है।

 

इस घटना से एक और आशंका को बल मिलता है कि अब क्रिकेट का स्वरूप बदल रहा है और यह यूरोप के फुटबाल की शक्ल लेता जा रहा है जहाँ हार के तनाव में खिलाडियों का आपा खोना आम बात है। आई पी एल को जिस प्रकार चालाकी से फुटबाल का यूरोपीय संस्करण बनाया जा रहा है उससे क्रिकेट की हत्या सुनिश्चित है। यहाँ तक कि प्रसिध्द क्रिकेट विश्लेषक और कमेंटेटर हर्ष भोगले ने भी एक प्रमुख अंग्रेजी समाचार पत्र में अपने स्तम्भ में आई पी एल को एक स्वाभाविक विकास बताया और कहा कि परिवर्तन होना अवश्यंभावी होता है आप चाहें या नहीं। हर्ष भोगले की बात से सहमति रखते हुए भी ऐसा लगता है कि यह परिवर्तन उतना स्वाभाविक नहीं है जितना इसके पीछे बाजारी शक्तियों की पैतरेबाजी है। आज क्रिकेट बाजार का एक हिस्सा हो गया है जो दूसरे सन्दर्भ में ही की गयी पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान शोएब मलिक की इस टिप्पणी को न्यायसंगत ठहराता है कि आईपीएल एक बालीवुड का शो जैसा लगता है।

 

हरभजन सिंह की हरकत तो एक संकेत मात्र है जो आने वाले दिनों में क्रिकेट में होने वाले परिवर्तन को इंगित करता है। अभी तो इसी प्रकार का उन्माद और जुनून यूरोप में फुटबाल क्लबों की भाँति आईपीएल की टीमों के समर्थकों में भी देखने को मिलेगा। कुल मिलाकर बाजार और पैसे की ताकत ने क्रिकेट के स्वभाव को बदलने का मन बना लिया है और अब खिलाडियों की प्रेरणा राष्ट्र ध्वज नहीं होकर उनपर लगने वाली बोली हुआ करेगी और अपनी ही टीम के खिलाडी एक दूसरे को प्रतिद्वन्दी के रूप में देखेंगे और महेन्द्र सिंह धोनी के नये तेवरों का जमकर प्रयोग करेंगे।

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