हिंदू जागरण

हिंदू चेतना का स्वर

हिन्दू होना अपराध हो गया?

Posted by amitabhtri on नवम्बर 12, 2008

आज जब मैं यह लेख लिखने बैठा तो मुझे पहली बार आभास हुआ कि 1975 में आपातकाल के समय देश में क्या वातावरण रहा होगा? देश की स्वतंत्रता के श्रेय का पेटेंट कराने वाला देश का सबसे पुराना राजनीतिक दल जब देश की अखण्डता और एकता की बात करता है तो यह सबसे बडा मजाक लगता है और ऐसा लगता है कि ये शब्द या तो इनके लिये मायने खो चुके हैं या फिर इनके लिये देश की अखण्डता और एकता का अर्थ हिन्दुओं का अपमान और तिरस्कार है। 29 सितम्बर को मालेगाँव धमाके की जाँच को लेकर जो रवैया केन्द्र सरकार उसके सहयोगियों और मीडिया ने अपना रखा है उससे तो लगता है कि हिन्दू हित की बात करने से किसी को भी भी आतंकवादी सिद्ध किया जा सकता है। उसके लिये केवल किसी हिन्दू संगठन से जुडा होना, देश की स्वतंत्रता का मूल्याँकन करते हुए काँग्रेस की भूमिका की समीक्षा करते दिखना चाहिये और हिन्दू स्वाभिमान की बात करते हुए दिखाई देना चाहिये। मालेगाँव धमाके की जाँच के बाद से देश में अघोषित आपातकाल का वातावरण बना दिया गया है और एटीएस मीडिया के साथ मिलकर न्यायालय से पहले ही किसी को भी अभियुक्त सिद्ध कर दे रहा है, किसी भी संत, राजनेता का नाम सन्देह के दायरे में लाकर खडा कर दे रहा है। परंतु उसके बाद सूचना असत्य होने पर किसी भी प्रकार का खेद प्रकाश नहीं किया जा रहा है। इस पूरे प्रकरण में जिस प्रकार मीडिया का उपयोग एटीएस ने किया है वह और भी चिंताजनक है। भारत में मीडिया और राजनीतिक दल जिस प्रकार राजनीतिक रूप से सही होने के सिद्धांत का पालन केवल मुस्लिम समाज की भावनाओं के लिये करते हैं वह और भी चिंताजनक है। देश में पिछले वर्षों में अनेक आतंकवादी आक्रमण हुए और सभी आक्रमणों में इस्लामी संगठन लिप्त पाये गये फिर भी जाँच एजेंसियों ने कभी भी मीडिया को ऐसे उपयोग नहीं किया और न हि मीडिया संगठनों ने इस प्रकार साहस पूर्वक खडे होकर मस्जिदों में इमामों या मुस्लिम धर्मगुरुओं के ऊपर कोई कहानी बनाई। आखिर ऐसा क्यों? अभी कुछ दिन पहले पहले आजमग़ढ में एक मुस्लिम सम्मेलन में भारत के प्रथम गृहमंत्री सरदार बल्लभभाई पटेल को नाथूराम गोड्से के बाद दूसरा आतंकवादी घोषित किया गया परंतु किसी टीवी चैनल ने इस सम्मेलन का लाइव नहीं किया क्यों? इसी प्रकार जब भी आतंकवादी आक्रमणों की जाँच के सिलसिले में किसी मस्जिद के इमाम या मौलवी से पूछताछ होने को हुई तो मुस्लिम समाज सड्कों पर उतरा लेकिन जनता को सच्चाई बताने का दावा करने वाले मीडिया संगठनों ने ऐसे स्थलों पर अपने संवाददाताओं को भेजना भी उचित नहीं समझा क्यों? इसका सीधा उत्तर है कि मीडिया भी जानता है कि कौन हिंसक प्रतिरोध कर सकता है और कौन सिर नीचे करके अपने धर्म का अपमान सहन कर सकता है।

जब से मालेगाँव विस्फोट की जाँच आरम्भ हुई है एक प्रकार का प्रचार युद्ध चलाया जा रहा है और इसमें मीडिया जाने अनजाने उपयोग हो रहा है। जिस दिन विस्फोट के सम्बन्ध में साध्वी प्रज्ञा को गिरफ्तार किया गया उसी दिन कांग्रेस के नेता राजीव शुक्ला के टीवी चैनल न्यूज 24 पर एक विशेष कार्यक्रम प्रसारित हुआ और साध्वी को हिन्दू आतंकवादी घोषित कर दिया गया। यह वही चैनल है जो मालेग़ाँव विस्फोट से पूर्व किसी भी आतंकवादी आक्रमण के बाद यही कहता था कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता। इसके बाद इंडिया टीवी ने प्रज्ञा साध्वी के गुरु द्वारा दिये गये दीक्षा मंत्र को आतंक का मंत्र घोषित करना आरम्भ कर दिया। इसी बीच साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित के नार्को टेस्ट और ब्रेन मैपिंग के बाद आज तक ने दहाड दहाड कर आवाज लगाई कि हरियाणा का आनन्द मन्दिर ही वह स्थान है जहाँ आतंकी हमले की साजिश रची गयी। संवाददाता एक ओर मन्दिर के अहाते में खडा होकर कह रहा था कि यही वह जगह है जहाँ मालेगाँव विस्फोट की साजिश रची गयी तो वहीं कुछ सेकण्ड बाद हरियाणा पुलिस का बयान आ रहा था कि इस प्रदेश में अनेक आनन्द मन्दिर हैं और यह पता नहीं कि एटीएस किस आनन्द मन्दिर की बात कर रही है। अब प्रश्न यह है कि ऐसे गैर जिम्मेदार समाचारों को क्या नाम दिया जाये।

मीडिया के गैरजिम्मेदारान रवैये का सबसे बडा उदाहरण तो यह है कि उत्तर प्रदेश में एटीएस के आते ही जिस प्रकार धर्मगुरु शब्द का प्रयोग कर सभी धर्मगुरुओं का मीडिया ट्रायल किया गया और यह क्रम दो दिनों तक चलता रहा और कभी किसी स्वामी का नाम तो कभी किसी स्वामी का नाम चटखारे ले लेकर लिया जाता रहा वह आखिर किस मानसिकता का परिचायक है। यह पहला अवसर नहीं है जब मीडिया ने किसी व्यक्ति या संस्था की अवमानना की हो और बेशर्मी से कभी यह भी न कहा हो कि उससे भूल हुई या उसे खेद है। मैं इस सम्बन्ध में क्रिकेट का एक उदाहरण देना चाहता हूं कि किस प्रकार 2000-1 में भारत को एकमात्र विश्व कप दिलाने वाले कप्तान कपिल देव के ऊपर क्रिकेट खिलाडी मनोज प्रभाकर द्वारा लगाये गये मैच फिक्सिंग के आरोप को लेकर मीडिया ने उनका मीडिया ट्रायल किया था और बाद में उनके आरोपमुक्त होने पर कभी यह भी नहीं सोचा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। आज वही कपिल देव और 1983 विश्व कप मीडिया का सबसे बडा बिकाऊ माल है।

इसी प्रकार एक उदाहरण प्रसिद्ध समाचार चैनल स्टार न्यूज चैनल से सम्बन्धित है जब काँची के शंकराचार्य की गिरफ्तारी के बाद इस चैनल की संवाददाता शीला रावल ने काँची मठ से रिपोर्ट दी कि शंकराचार्य ने जाँच एजेंसियों से समक्ष रोते हुए अपनी भूल मानकर हत्या में संलिप्त्ता मान ली है यदि यह समाचार उस समय सही था तो शंकराचार्य को न्यायालय से सजा क्यों नहीं दी? लेकिन इस चैनल ने शंकराचार्य के रिहा होने पर यह याद भी नहीं किया होगा कि उसकी ओर से ऐसा कोई समाचार प्रसारित हुआ था। इसी प्रकार कितने ही उदाहरण हैं जब हिन्दू धर्मगुरुओं का उपहास किया गया, उनके ऊपर आरोप लगाये गये, उन्हें असम्मानित ढंग से सम्बोधित किया गया पर ऐसा साहस न तो कभी इस्लाम के सम्बन्ध में किया गया और न ही ईसाई धर्म के सम्बन्ध में। आखिर यह कैसा सेक्युलरिज्म है जो कहता है कि हिन्दू को बिना आरोप दोषी सिद्द कर दो और मुसलमानों के सम्बन्ध में कहो कि किसी समुदाय विशेष ने ऐसा किया वैसा किया।

आज देश में यदि मीडिया या राजनेता एकाँगी सेक्युलरिज्म का पालन कर रहे हैं तो उसके पीछे केवल यही कारण है कि हिन्दू की स्थिति एक गाय की तरह है जो मक्खी हटाने के लिये केवल पूँछ का प्रयोग करती है और सींग का उपयोग करना तो उसे आता ही नहीं।

मालेगाँव विस्फोट की जाँच भारतीय समाज और राजनीति के लिये एक टर्निंग प्वाइंट है। इस जाँच के दौरान मुझे व्यक्तिगत रूप से अनेक प्रदेशों का दौरा करने का अवसर मिला और इसमें से कुछ वे प्रदेश भी हैं जहाँ विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इन प्रदेशों में सामान्य लोगों से बातचीत में जो बात उभर कर आयी वह दीर्घगामी स्तर पर उन नेताओं के लिये शुभ नहीं है जो मुस्लिम वोट के लिये हिन्दुओं को अपमानित करने के बाद भी हिन्दुओं के वोट की आस लगाये हैं। मध्य प्रदेश में मैं कुछ क्षणों के लिये एक नाई की दूकान पर ठहरा और प्रज्ञा मामले में पूछने लगा तो उसकी सहज सामान्य बात सुनकर सोचने को विवश हुआ कि यदि हमारी राजनीति देश में ऐसा विभाजन कर रही है तो इसका परिणाम क्या होगा? उस नाई ने सहज रूप में कहा कि देखिये देश तो पूरी तरह विभाजित हो चुका है और कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है और भाजपा हिन्दुओं की। मैने पूछा कि ऐसा उसे क्यों लगता है तो उसका उत्तर किसी बडे विशेषज्ञ या मँजे हुए की भाँति था कि देश में पिछले अनेक वर्षों में कितने ही आतंकवादी विस्फोट हुए हैं पर किसी भी मामले में आरोपी पकडे नहीं गये और यदि पकडे भी गये तो उन्हें जेल में बैठा कर रखा गया और अब चुनाव को देखकर कांग्रेस साध्वी प्रज्ञा को मोहरा बना रही है। यही भाव मुझे सर्वत्र दिखाई दिया। और तो और अनेक सम्पन्न और सम्भ्रांत लोग तो साध्वी प्रज्ञा को साहस का प्रतीक मानकर उसका अभिनन्दन करते हैं और इसे हिन्दू शौर्य का प्रकटीकरण मानने से संकोच नहीं करते।

अनेक प्रदेशों में ग्रामीण क्षेत्रों में भी दौरा करते हुए मैने यही पाया कि पिछले चार वर्षों में जिस प्रकार केन्द्र सरकार ने आतंकवाद के प्रति नरमी दिखाई उसे वोटबैंक से जोडकर देखा जा रहा है और अब अचानक सरकार जिस प्रकार हिन्दू आतंकवाद की अवधारणा का सृजन कर इस्लामी आतंकवाद को संतुलित करने का प्रयास कर रही है उससे देश में साम्प्रदायिक विभाजन और ध्रुवीकरण अधिक तीव्र हो गया है। आज आतंकवाद पर चर्चा केवल शहरों या महानगरों तक सीमित नहीं है। हर दो तीन गाँवों के आसपास छोटा बडा बाजार है और इन बाजारों में युवा उसी प्रकार एकत्र होता है जैसे नगरों में और उन्हीं विषयों पर चर्चा करता है जैसा नगर के युवक करते हैं। उसकी चर्चा क्रिकेट, फिल्म, देश की आंतरिक और विदेश नीति, अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव से लेकर ओसामा बिन लादेन, तालिबान और देश में पनप रहे आतंकवाद तक होती है। देश में आ रहे इस परिवर्तन को हमारे राजनेता समझने में असफल हैं और देश को नगर और गाँव के रूप में विभाजित कर इस बात की खुशफहमी पाले बैठे हैं कि गाँव की भोली जनता अब भी उनके तर्कों से भी प्रभावित होती है और उसका अपना कोई वैचारिक आधार नहीं है। यही परिवर्तन पिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस की लगातार हो रही पराजय का कारण है और अब जिस प्रकार कांग्रेस ने मुस्लिम वोट प्राप्त करने के लिये न्यूनतम राजनीतिक हथखण्डे अपनाये हैं उससे उसकी छवि में काफी गिरावट आयी है।

पिछ्ले कुछ वर्षों में देश में हिन्दुओं की धर्म और संस्कृति के प्रति बढ रही आकाँक्षा को नजरअन्दाज किया गया है। 1990 के दशक से हुए आर्थिक उदारीकरण और वैश्वीकरण के बाद जिस प्रकार सूचना की अबाध प्राप्ति होने लगी और विदेशों में बसे हिन्दुओं को अपनी जडों और अपनी नयी पीढी को संस्कारित करने की प्रवृत्ति बढी तो अनिवासी हिन्दुओं में भारत की हिन्दू पहचान को लेकर जो उत्सुकता बढी उससे भारत में बसे हिन्दुओं में पिछली पीढी की अपेक्षा हीन भावना कम हो गयी और यही कारण है कि भारत की नयी पीढी का रूझान एक ऐसे राष्ट्रवाद के प्रति है जो कांग्रेसी राष्ट्रवाद नहीं वरन हिन्दुत्व आधारित राष्ट्रवाद है।

मीडिया और अधिकाँश राजनीतिक दल यदि इस बदलाव को अनुभव कर पाते तो शायद वे देश के साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण को कुछ हद तक रोक पाते लेकिन कांग्रेस सहित तमाम सेक्युलर दल यह भूल 1991 के बाद से लगातार करते आ रहे हैं। पहले राम मन्दिर आन्दोलन को समझने की भूल, फिर गोधरा काँड के बाद हुए दंगों को समझने की भूल और अब आतंकवाद के इस्लामी स्वरूप को समझकर उसका समाधान न कर पाने की भूल दीर्घगामी स्तर पर अत्यंत खतरनाक सिद्ध होने वाली है।

आज देश में मीडिया, सेक्युलर दलों को इस बात पर शोध करना चाहिये कि इनके सेक्युलरिज्म के प्रचार के बाद भी हिन्दुत्ववादी संगठनों का समाज पर क्यों बढ्ता जा रहा है। इस पर गम्भीर शोध की आवश्यकता है न कि खीझ में आकर उन्हें गाली देकर बदनाम करने की। आज यदि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विहिप या भाजपा का विस्तार हो रहा है और उन्हें साम्प्रदायिक और देश की एकता के लिये खतरनाक बताने के बाद भी जनता का विश्वास उनके साथ है तो निश्चित ही इसके पीछे कोई ठोस कारण होगा। आज यदि मीडिया और सेक्युलर दल इस कारण के मूल में जाने का प्रयास करते तो उन्हें सार्थक उत्तर मिलते कि किस प्रकार देश में बहुसंख्यक अपने ही देश में डरा और सहमा है। उसकी अतीन्द्रिय मानसिकता में मुस्लिम शासन की 600 वर्ष की पराधीनता और अफगानिस्तान में तालिबान शासन की भयावह तस्वीर गहरी जड जमा चुकी है। विश्व पर शासन की आकाँक्षा लिये कट्टरपंथी इस्लाम का आन्दोलन उसके लिये दुस्वप्न सा लगता है और अपने ही देश में धिम्मी होने का भय किसी भी प्रकार नहीं जाता और ऐसे में सेक्युलरिज्म के नाम पर जब हिन्दू लाँछित और अपमानित होता है तो उसका भय और भी बढ्ता है।

जिस देश में प्रधानमंत्री को मुस्लिम के आरोपी बनाये जाने पर या सन्देह के आरोप में आस्ट्रेलिया में हिरासत में लेने पर रात भर नींद नहीं आती उसी प्रधानमंत्री की ओर से कोई बयान तब नहीं आता जब उडीसा में 40 वर्षों से आदिवासियों की सेवा कर रहे हिन्दू संत की 84 वर्ष की अवस्था में हत्या कर दी जाती है। क्या भारत के कांग्रेसी प्रधानमंत्री की संवेदना भी सेक्युलर है जो तभी विचलित होती है जब मुसलमान या ईसाई को दर्द होता है। जिस देश में करोडों रूपये हज सब्सिडी पर दिये जाते हैं उसी देश में हिन्दुओं को जम्मू में अपनी तीर्थयात्रा के लिये भूमि के लिये संघर्ष करना पड्ता है। जिस देश में संसद पर आक्रमण के लिये मृत्युदण्ड प्राप्त आतंकवादी को फाँसी नहीं होती और उसका खुलेमाम बचाव किया जाता है वहीं मालेग़ाँव विस्फोट के लिये आरोपी बनायी गयी साध्वी को मीडिया द्वारा दोषी सिद्ध होने से पहले ही आतंकवादी ठहरा दिया जाता है। केन्द्र सरकार के घटक दल खुलेआम इस्लामी आतंकवादी संगठन सिमी के पक्ष में बोलते हैं और बांग्लादेशी घुसपैठियों को देश की नागरिकता देने की वकालत करते हैं और विद्या भारती द्वारा संचालित विद्यालयों के पाठ्यक्रम को प्रतिबन्धित करने की बात करते हैं क्योंकि वे शिवाजी, राणाप्रताप को आदर्श पुरुष बताते हैं। रामविलास पासवान का तर्क है कि विद्याभारती के विद्यालय गान्धी के स्वाधीनता आन्दोलन में भूमिका पर प्रश्न खडे करते हैं इसलिये इस पर प्रतिबन्ध लगना चाहिये। अर्थात देश में विचारों की स्वतंत्रता पर आघात होगा।
इतना तो स्पष्ट है कि हिन्दू धर्म और संस्कृति एक बार फिर अत्यंत कठिन दौर से गुजर रहा है जब सेक्युलरिज्म के नाम पर हिन्दू होना अपराध ठहराने का प्रयास किया जा रहा है।

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10 Responses to “हिन्दू होना अपराध हो गया?”

  1. ब्भारत में हिन्दू होना अपराध हो गया.
    सेकूलर नेताओं से यह पाप हो गया

  2. Sachin Semwal said

    अति उत्तम….अगर यह तर्क किसी नेता के आगे रख दिया जाये तो उसकी ज़बान हमेशा के लिए बन्द हो जायेगी….

  3. अब सिर्फ हिन्दू राष्ट्र का निर्माण ही इन सब बातो का उत्तर हो सकता है.. हिन्दू राष्ट्र के निर्माण के लिए सभी हिन्दू भाईऔ को और बहेनो को जागृत होना होगा.
    || जय हिन्दू राष्ट्र ||
    || भारत माता की जय ||

  4. ranjit said

    ye sab congress ke rajniti he vo janti he ke vote bank ke saharay he vo satta per rahe sakti he congress ke bas chale to ye apni ma or sister tak ko bach dale aam aadmi ke inko koi chinta hahi he unehe satta chahiya n ke hindu rasth.aagar is desh ko bachana he to is vote bank ke rajniti ko finish karna hoga. jo bhi iske aade me aaye usay jail me dal do

  5. Haris Sohail said

    are Bhai Hindu words ka Matlab Jante Ho Hindu words to Tum Logon ko Purtgaliyon ne Diya hai, kab tak is words ko apne upar lagu karte rahoge. Hindu Dharam to koi Dharam hi Nahin he Tumhara Sahi nam Sanatan Dharam Hai. Jab Nam Tak Naqli Hai To Dharam ki Shiksha me Bhi Milawat hai. Vedon Ko parhte Nahi Ho Jisme Murti Puja ka saaf saaf Varjit he.

  6. NATION BUILDERS said

    REAL HISTORY OF AYODHYA
    FROM WIKIPEDIA
    DEAR HINDUS
    When the Muslim emperor Babur came down from Ferghana in 1527, he defeated the Hindu King of Chittodgad, Rana Sangrama Singh at Sikri, using cannon and artillery. After this victory, Babur took over the region, leaving his general, Mir Baqi, in charge as viceroy.
    Mir Baqi allegedly destroyed the temple at Ayodhya, built by the Hindus to commemorateRama’s birthplace, and built the Babri Masjid, naming it after Emperor Babur.[9] Although there is no reference to the new mosque in Babur’s diary, the Baburnama, the pages of the relevant period are missing in the diary. The contemporary Tarikh-i-Babari records that Babur’s troops “demolished many Hindu temples at Chanderi”[10]
    Palaeographic evidence of an older Hindu temple on the site emerged from an inscription on a thick stone slab recovered from the debris of the demolished structure in 1992. Over 260 other artifacts were recovered on the day of demolition, and many point to being part of the ancient temple. The inscription on the slab has 20 lines, 30 shlokas (verses), and is composed in Sanskrit written in the Nagari script. The ‘Nagari Lipi’ script was prevalent in the eleventh and twelfth century.
    The first twenty verses are the praises of the king Govind Chandra Gharhwal (AD 1114 to 1154) and his dynasty. The twenty-first verse says the following; “For the salvation of his soul the King, after paying his obeisance at the little feet of Vamana Avatar (the incarnation of Vishnu as a midget Brahmana) went about constructing a wondrous temple for Vishnu Hari (Shri Rama) with marvelous pillars and structure of stone reaching the skies and culminating in a superb top with a massive sphere of gold and projecting shafts in the sky – a temple so grand that no other King in the History of the nation had ever built before.”
    It further states that this temple (ati-adbhutam) was built in the temple-city of Ayodhya.

  7. kuldeep said

    hidu bhaiyo apna vote hinduvadi logo ko he dena hinu ko majboot
    karan, aaj pakistan se hindu ko bhgaya ja raha hai

  8. blogtaknik said

    हल्ला बोल हिन्दुओ का पहला साज़ा मंच

  9. अमोद श्रीवास"अंबर" said

    हिंदू बहुल देश भारत में हिंदुओं पर अन्याय अत्याचार व हिंदुओं के स्वाभिमान को ठेस पहुँचा कर उन्हे मानसिक रूप से प्रताडित करने का प्रयास ,इस प्रकार का कृत्य करने वालों को बहुत भारी पड़ेंगा ।

  10. अमोद श्रीवास"अंबर" said

    यह प्रमाणित सिद्धांत हैं कि स्प्रिंग को जितने जोर से दबाया जाएँ वह उतनी ही जोर से ऊपर उछलती हैं ।

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